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सिम्स हॉस्पिटल में आयोजित तनाव प्रबंधन कार्यक्रम

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बिलासपुर, 18 दिसंबर (देशबन्धु)। हम अपने मकान, कपड़े एवं अपने शरीर की प्रतिदिन सफाई अवश्य करते हैं। छुट्टी के दिन तो और भी एक्स्ट्रा सफाई करते हैं। परंतु मन जिसमें अनेक प्रकार के विचार आते हैं और जिन विचारों का सीधा प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है हम उसकी तरफ ना कभी ध्यान देते हैं और ना ही कभी उसकी स्वच्छता की ओर ध्यान देते हैं। जिससे हमारा मन दिन-प्रतिदिन और भी दूषित और कमजोर होता जा रहा है।

उक्त व्यक्तव्य प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय बिलासपुर की मुख्य शाखा राजयोग भवन की संचालिका बीके स्वाति दीदी ने छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, सिम्स हॉस्पिटल में आयोजित एम.बी.बी.एस. स्नातक, स्नातकोत्तर (एम. डी. एम.एस.) के छात्र-छात्राओं, इन्टर्न एवं चिकित्सा शिक्षकों को तनाव प्रबंधन कार्यक्रम में सम्बोधित करते हुए कहीं। दीदी ने आगे कहा कि आज से 30 35 साल पहले, तनाव शब्द सिर्फ विज्ञान की एक भाषा थी, और ये हमारी बातचीत का हिस्सा भी नहीं था। जबकि

हम उस समय आज से ज्यादा मेहनत करते थे, और परिस्थितियां भी उतनी ही चुनौतीपूर्ण थीं जितनी कि आज हैं। पर फिर भी किसी ने ये नहीं कहा कि, मुझे तनाव महसूस हो रहा है। फिर धीरे-धीरे हम सभी इसे एक इमोशन मानने लगे और अपने मन की दशा को बताने के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे। और साथ ही, हम ये दर्शाने के लिए कि, हम कितनी कड़ी मेहनत करते हैं, यहां तक कि हमारे नियमित कार्यों में थोड़ा ऊपर-नीचे होने को भी हम तनाव मान बैठे और कहने लगे कि, हम तनाव में हैं। दीदी ने कहा कि तनाव हमारे ही गलत विचारों का परिणाम है। जो हमें ये बताता है कि हमारे अंदर कुछ ऐसा है जिसे बदलने की जरूरत है। और आजकल जब हम अपने चारों तरफ हर किसी को तनाव में देखते हैं, तब हम ये सोचते हैं कि, आज के समय में थोड़ा तनाव होना बिल्कुल सामान्य और स्वाभाविक है। तनाव का प्रभाव, ना सिर्फ हमारे शारीरिक बल्कि भावनात्मक अवस्था या हालचाल पर भी पड़ता है। ये हमारी मेमोरी, क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और कार्य प्रदर्शन पर भी प्रभाव डालता है। इसलिए कम या ज्यादा तनाव, हर तरह से हानिकारक है। जिन परिस्थियों पर हमारा कोई नियन्त्रण नहीं है उसे नियंत्रित करने के प्रयास से हमें तनाव होने लगता है। हम अपनी तुलना दुसरे से करते है या किसी बात को पकड़ कर रख लेते है जिससे तनाव होने लगता है। जब हमारी आंतरिक शक्तियां कम होती हैं तो एक छोटा सा भी प्रेशर भी हमें बड़ा तनाव दे सकता है। इसलिए हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि, हम किसी भी परिस्थिति में अपनी आंतरिक शक्ति को बढ़ाकर अपने मन को शक्तिशाली बनायें। अपने जीवन में कुछ सकारात्मक परिवर्तन, आध्यात्मिकता एवं प्रतिदिन कुछ देर मैडिटेशन करने से हम तनाव से मुक्त हो सकते है। विभिन्न एक्टिविटीज एवं मैडिटेशन के द्वारा बीके स्वाति दीदी ने बहुत सरल तरीके से तनाव मुक्त रहने की तकनीक सिखाई। उससे पहले सिम्स के डीन डॉ. रामनेश मूर्ति जी के मार्गदर्शन में माँ सरस्वती की प्रतिमा में माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्भकिया गया। स्टूडेंट सेल प्रभारी डॉ. सगारिका प्रधान जी ने दीदी को पौधा देकर एवं डॉ मधुमिता मूर्ति जी ने शॉल उढ़ाकर स्वागत किया। डॉ हेमलता ठाकुर, डॉ प्रशांत निगम, डॉ विनोद टंडन, डॉ समीक्षा, डॉ एस. अग्रवाल, बीके संतोषी दीदी, हेमंत अग्रवाल, फैकल्टी, स्टाफ एवं लगभग 200 एमबीबीएस विद्यार्थी उपस्थित रहे। मेडिकल लैब टेक्नीशियन शिरोमणि नायक ने कुशल मंच संचालन किया।

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ब्रह्माकुमारीज राजयोग भवन में निःशुल्क बाल संस्कार शिविर का आयोजन

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जब मिट्टी मुलायम होती है, उस समय हम जो आकार देना चाहें दे सकते हैं, लेकिन जब मिट्टी सूखकर कड़ी हो जाए, उस समय हम चाहकर भी उसका रूप परिवर्तन नहीं कर सकते। इसी प्रेरणादायी विचार के साथ बच्चों के चरित्र निर्माण और सर्वांगीण विकास हेतु प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी ‘बाल संस्कार शिविर’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है।

टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित मुख्य शाखा राजयोग भवन में पिछले 28 वर्षों से भी अधिक समय से निरंतर यह शिविर आयोजित किया जा रहा है। सेवाकेन्द्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने बताया कि बच्चों की 07 से 15 वर्ष की आयु व्यक्तित्व परिवर्तन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इस उम्र में सिखाए गए नैतिक मूल्य और संस्कार बच्चे स्वतः ही जीवन भर के लिए अपना लेते हैं। इस वर्ष यह शिविर 24 अप्रैल (शुक्रवार) से 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) तक आयोजित किया जाएगा। शिविर का समय प्रतिदिन सुबह 07:30 से 09:30 बजे तक रहेगा।

बीके स्वाति दीदी ने बताया कि 7 दिवसीय इस शिविर में बच्चों को आधुनिक चुनौतियों से निपटने और मानसिक रूप से सशक्त बनाने

के लिए विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें मुख्य रूप से इनर पर्सनालिटी डेवलपमेंट और मेमोरी पावर बढ़ाना, एकाग्रता (Concentration) और राजयोग मेडिटेशन, मोबाइल और स्क्रीन एडिक्शन के नुकसान और उससे बचाव, इमोशनल इंटेलिजेंसः कठिन परिस्थितियों में खुद को स्थिर रखना, नैतिक मूल्यः माता-पिता का सम्मान, कृतज्ञता का भाव और अच्छी आदतें, शारीरिक गतिविधियाँः प्राणायाम, एरोबिक्स और पर्यावरण के प्रति जागरूकता।

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एलाइट हॉस्पिटल में ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ का गरिमामयी उत्सव

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एलाइट हॉस्पिटल में ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के उपलक्ष्य में एक विशेष प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बिलासपुर मुख्य सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी जी एवं ब्रह्माकुमारी संतोषी दीदी जी उपस्थित रहीं। ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी ने हॉस्पिटल की महिला चिकित्सकों को उनकी निस्वार्थ सेवा और शक्ति के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. कविता बब्बर, डॉ. प्रियंका जोशी, डॉ. प्रभा साहू, डॉ. भाग्यश्री, डॉ. श्वेता, डॉ. अभिलाषा डॉ. मंजूलताडॉ. मनीषा गुप्ता डॉ. सपना डॉ. रानू, साथ ही अस्पताल के समस्त नर्सिंग और मैनेजमेंट स्टाफ ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया। दीदी के आध्यात्मिक संदेश ने सभी के मन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार किया।

तेलुगु संयुक्त समाज कल्याण समिति के तत्वावधान में ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बिलासपुर ब्रह्माकुमारीज मुख्य सेवाकेंद्र से बीके संतोषी दीदी का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बिलासपुर की महापौर श्रीमती पूजा विधानी जी, पूर्व महापौर श्रीमती वाणी राव जी एवं तेलुगु समाज की भारी संख्या में प्रबुद्ध महिलाएँ उपस्थित रहीं।

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सच्ची शिवरात्रि वही, जब हम अपनी बुराइयां शिव को सौंप दें

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महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्म-परिवर्तन और नवसृजन का दिव्य संदेश लेकर आता है। रविवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में 90वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव पर विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित किए गए। इस दौरान शिव ध्वजारोहण कर भाई-बहनों को जीवन की बुराइयां छोड़ने और पवित्र जीवन : जीने की प्रतिज्ञा कराई गई। बीके स्वाति दीदी ने कहा कि महाशिवरात्रि परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण का स्मृति पर्व है।

यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि जब-जब संसार में धर्म की ग्लानि बढ़ती है और मानव मूल्यों का पतन होता है, तब परमात्मा स्वयं इस धरा पर अवतरित होकर मानव को नई दिशा देते हैं।
यही कारण है कि शिवरात्रि को सभी पर्वों में महान माना गया है। दीदी ने बताया कि शिव पर अक धतूरा और भांग अर्पित करने का वास्तविक आध्यात्मिक रहस्य यह है कि हम अपने जीवन की कांटों जैसी बुराइयां-काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार परमात्मा को सौंप दें। जिस प्रकार दान की गई वस्तु वापस नहीं ली जाती, उसी प्रकार जब हम अपनी नकारात्मक आदतें और बुरे संस्कार परमात्मा को अर्पित कर देते हैं, तो उनसे सदा के लिए मुक्त हो सकते हैं। यही सच्ची शिवरात्रि है।
योग अभ्यास से आत्मा बनती है पवित्र और शक्तिशाली
बीके स्वाति दीदी ने कहा कि परमात्मा शिव ज्योतिबिंदु स्वरूप है, उनका कोई शारीरिक जन्म नहीं होता। वे दिव्य अवतरण द्वारा सृष्टि के संधिकाल में मानव कल्याण के लिए आते हैं। शिव स्वयं अजन्मा, अभोक्ता और सर्वशक्तिमान हैं। शिवलिंग परमात्मा शिव का प्रतीक है, जो हमें उनके निराकार ज्योति स्वरूप की याद दिलाता है। आज का समय कलियुग का अंतिम चरण है, जिसे महारात्रि भी कहा गया है। बढ़ता तनाव, हिंसा, नैतिक पतन और प्रकृति का असंतुलन विश्व परिवर्तन की ओर संकेत कर रहे हैं। ऐसे समय में परमात्मा सहज राजयोग की शिक्षा देकर देवतुल्य जीवन जीने की प्रेरणा दे रहे हैं।

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