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राजयोग भवन में आयोजित कार्यक्रम -“आज के परिवेश में सनातन संस्कृति की आवश्यकता “
भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो विश्व के कल्याण की बात करता है। भारत विश्व गुरु था और फिर से एक दिन निश्चित रूप से विश्व गुरु बनेगा। स्वर्णिम भारत की परिकल्पना जल्द ही साकार होगी। दुनिया के इतिहास में सच्चाई और शांति का संदेश देने वाला भारत के अलावा और कोई दूसरा राष्ट्र नहीं है। भारतीय होना अपने आप में गर्व और शान की बात है। उक्त वक्तव्य प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय बिलासपुर की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में आयोजित कार्यक्रम आज के परिवेश में सनातन संस्कृति की आवश्यकता विषय पर सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने कहा। दीदी ने कहा कि भारत देवी- देवताओं की भूमि है। यहां की सभ्यता में वह मूल्य की पूंजी है जो दूसरे देशों में देखने को नहीं मिलती है। एक भारत देश ही है जिसे माता शब्द से सम्बोधित किया जाता है और किसी भी देश के साथ कभी माता का संबोधन नहीं होता है। भारत ने सबको शरण दी है। भारत ने ही विश्व को आदर्श और मूल्यों का ज्ञान दिया है। विश्व को एक परिवार मानते है। विश्व की सभी आत्मायें शांति की तलाश में हैं। पर उन्हें क्षणिक शांति ही मिल पा रही है। अगर हमें सच्ची शांति चाहिए तो हमें अध्यात्म की तरफ वापस लौटना होगा। अध्यात्म हमें हमारी आत्मा से जोड़ता है अर्थात यह अंतर्जगत की एक ऐसी यात्रा है जिसमें हम अपने मन और बुद्धि को अपनी आत्मा की तरफ मोड़कर परमपिता परमात्मा से जुड़ते हैं। शांति के सागर से असीम शांति की किरणें आत्मा में भरकर पूरे विश्व में शांति का प्रकम्पन फैलाते हैं। सारे विश्व की निगाहें भारत की ओर हैं क्योंकि भारत में पुरातन संस्कृति अध्यात्म और योग हमें वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना सिखाती है। सर्व भवंतु सुखिन की भावना और सोच वाली हमारी संस्कृति है। अपने बेटे को डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक बनाने के पहले एक अच्छा इंसान बनाएं। हर मां को यह संकल्प करना चाहिए। अच्छा इंसान बनना आज समय की जरूरत है। कितनी भी भौतिक सुख-सुविधाएं, पैसा कमा लें लेकिन यदि जीवन में सुख-शांति, आनंद, प्रेम, सुख और पवित्रता नहीं तो सब व्यर्थ है।
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एलाइट हॉस्पिटल में ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ का गरिमामयी उत्सव
एलाइट हॉस्पिटल में ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के उपलक्ष्य में एक विशेष प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बिलासपुर मुख्य सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी जी एवं ब्रह्माकुमारी संतोषी दीदी जी उपस्थित रहीं। ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी ने हॉस्पिटल की महिला चिकित्सकों को उनकी निस्वार्थ सेवा और शक्ति के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. कविता बब्बर, डॉ. प्रियंका जोशी, डॉ. प्रभा साहू, डॉ. भाग्यश्री, डॉ. श्वेता, डॉ. अभिलाषा डॉ. मंजूलताडॉ. मनीषा गुप्ता डॉ. सपना डॉ. रानू, साथ ही अस्पताल के समस्त नर्सिंग और मैनेजमेंट स्टाफ ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया। दीदी के आध्यात्मिक संदेश ने सभी के मन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार किया।
तेलुगु संयुक्त समाज कल्याण समिति के तत्वावधान में ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बिलासपुर ब्रह्माकुमारीज मुख्य सेवाकेंद्र से बीके संतोषी दीदी का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बिलासपुर की महापौर श्रीमती पूजा विधानी जी, पूर्व महापौर श्रीमती वाणी राव जी एवं तेलुगु समाज की भारी संख्या में प्रबुद्ध महिलाएँ उपस्थित रहीं।
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सच्ची शिवरात्रि वही, जब हम अपनी बुराइयां शिव को सौंप दें
महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्म-परिवर्तन और नवसृजन का दिव्य संदेश लेकर आता है। रविवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में 90वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव पर विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित किए गए। इस दौरान शिव ध्वजारोहण कर भाई-बहनों को जीवन की बुराइयां छोड़ने और पवित्र जीवन : जीने की प्रतिज्ञा कराई गई। बीके स्वाति दीदी ने कहा कि महाशिवरात्रि परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण का स्मृति पर्व है।
यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि जब-जब संसार में धर्म की ग्लानि बढ़ती है और मानव मूल्यों का पतन होता है, तब परमात्मा स्वयं इस धरा पर अवतरित होकर मानव को नई दिशा देते हैं।
यही कारण है कि शिवरात्रि को सभी पर्वों में महान माना गया है। दीदी ने बताया कि शिव पर अक धतूरा और भांग अर्पित करने का वास्तविक आध्यात्मिक रहस्य यह है कि हम अपने जीवन की कांटों जैसी बुराइयां-काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार परमात्मा को सौंप दें। जिस प्रकार दान की गई वस्तु वापस नहीं ली जाती, उसी प्रकार जब हम अपनी नकारात्मक आदतें और बुरे संस्कार परमात्मा को अर्पित कर देते हैं, तो उनसे सदा के लिए मुक्त हो सकते हैं। यही सच्ची शिवरात्रि है।
योग अभ्यास से आत्मा बनती है पवित्र और शक्तिशाली
बीके स्वाति दीदी ने कहा कि परमात्मा शिव ज्योतिबिंदु स्वरूप है, उनका कोई शारीरिक जन्म नहीं होता। वे दिव्य अवतरण द्वारा सृष्टि के संधिकाल में मानव कल्याण के लिए आते हैं। शिव स्वयं अजन्मा, अभोक्ता और सर्वशक्तिमान हैं। शिवलिंग परमात्मा शिव का प्रतीक है, जो हमें उनके निराकार ज्योति स्वरूप की याद दिलाता है। आज का समय कलियुग का अंतिम चरण है, जिसे महारात्रि भी कहा गया है। बढ़ता तनाव, हिंसा, नैतिक पतन और प्रकृति का असंतुलन विश्व परिवर्तन की ओर संकेत कर रहे हैं। ऐसे समय में परमात्मा सहज राजयोग की शिक्षा देकर देवतुल्य जीवन जीने की प्रेरणा दे रहे हैं।
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“एग्जाम मंत्रा” – परीक्षा के तनाव को कहें अलविदा
अरपा कम्युनिटी रेडियो 90.8 FM के तत्वावधान में आयोजित ‘एग्जाम मंत्रा’ कार्यशाला में छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक विशेष सत्र संपन्न हुआ। इस सत्र में ब्रह्माकुमारीज बिलासपुर की मुख्य सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान होने वाले मानसिक तनाव से निपटने के अचूक मंत्र दिए और एकाग्रता बढ़ाने के प्रभावी उपाय साझा किए। दीदी ने समझाया कि शांत मन ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। कार्यक्रम के अंत में दीदी के बहुमूल्य मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें मोमेंटो (स्मृति चिन्ह) प्रदान कर सम्मानित किया गया।
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